awakening the third eye तीसरा नेत्र जगाने का रहस्य

awakening the third eye तीसरा नेत्र जगाने का रहस्य

मनुष्य अपनी क्षमता का केवल एक छोटा सा अंश ही उपयोग कर रहा है। तीसरा नेत्र जगाना   awakening the third eye hindi

हम अपनी क्षमताओ को जानते ही नहीं है! हम अपनी विचार और भावनाओ में जिंदगी गुजार देते है! हम अपनी आँखे से बाहर की दुनिया को देखते है! पर हमारे अन्दर जो ब्रह्मांड (world) उसकी हमें कोई खबर ही नहीं है!

  awakening the third eye तीसरा नेत्र जगाने का रहस्य  सिद्धांत और कार्य का तरीका

awakening the third eye  लिए आप कोई जबरदस्ती मत करो, ध्यान केंद्रित मत करो, बस जागरूक रहो !

हम जिस्म और आत्मा का combination है ये बात तो आपको पता ही है! आत्मा हम तक है तब तक ये body work करती है! अगर अपनी आत्म जाने के लिए आगे बढ़ रहे है! इसे awakening the third eye  कहते है !

अगर इसके लिए आप कठिन प्रयास या जबरदस्ती, अगर आप ऐसा करते तो क्या होता?

आप अपने सामान्य दिमाग से काम करेंगे, जिसका अर्थ है कि

अपने आप का वह अंश जिसके साथ आप वर्तमान में सोचते हैं ! चेतन मन use करते है! चेतन आपके कर्मो और आदतों के अनुरूप विचार आपके सामने लाता है !

मन जो आपके दिमाग में हर समय बात करता रहता है। आपके आपने मन विचार काटे नहीं जो अच्छा और बुरा विचार आ रहा है उसको आने दे!

लेकिन जागरूक रहें। अनुमति दें कि क्या छिपा है

गहराई के माध्यम से आने और अपनी चेतना के लिए प्रकट होने के लिए।

कुछ मत करो, बातें होने दो। जो आता है उसके साथ बहो।

भौतिक दुनिया में जब आप कुछ चाहते हैं उसको पाने के लिये आपको प्रयास करना पड़ता है

awakening the third eye तीसरा नेत्र जगाने का रहस्य
awakening the third eye तीसरा नेत्र जगाने का रहस्य

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लेकिन आध्यात्मिक दुनिया में सब कुछ उलट है, जैसा कि

एक दर्पण के दूसरी तरफ। अगर आप कुछ चाहते हैं तो आपको उससे आपने आप होने देना होगा!

चेतना की अवस्थाओं को प्रकट होने दें जागरूक रहें, और सब कुछ हो जाएगा।

कोई रचनात्मक दृश्य नहीं, कोई कल्पना नहीं, बस जागरूकता

अगर आपको कोई रोशनी दिखती या एनी कोई चीज़ दिखती है ठीक है! पर कल्पना अपने दिमाग कुछ मत डाले!

awakening the third eye को आप ईश्वर इबादत या प्राथनाएं को समझकर सरल रूप करते रहे!

कुछ भी बनाने के लिए, चिंता करने में अपना समय बर्बाद न करें

शांत रहे और अपने के अनुसार अभ्यास करते रहें! अनुभव के दौरान विश्लेषण न करें

कुछ घटित होते ही विश्लेषण करने की कोशिश न करें।

प्रतिदिन दस से बीस मिनट से अधिक ध्यान व्यायाम करें।

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